Saturday, May 25, 2024

जैव विविधता और पर्यावरण

सर्वाधिक ऊँचाई पर एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना

लद्दाख एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है, जिसके चलते यहाँ अपशिष्ट उत्पादन में वृद्धि हुई है। अपशिष्ट उत्पादन में वृद्धि को देखते हुए लद्दाख नगरपालिका समिति ने अपनी सर्वोच्च एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना (Incorporated Strong Waste Administration Venture ISWMP) शुरू की है।

प्रमुख बिंदु क्या हैं?

इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ती अपशिष्ट समस्या का प्रबंधन करना है।

पूर्व में उचित अपशिष्ट प्रबंधन योजना के अभाव में अपशिष्ट के ढेर लग जाते थे जिनके चलते दुर्घटनाएँ होती थीं।

अब नगरपालिका शहर को साफ-सुथरा रखने तथा अपशिष्ट को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने का प्रयास कर रही है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना लद्दाख में अपशिष्ट चुनौती से निपटने हेतु एक सराहनीय पहल है।

वर्ष 2025 में भारत के शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट उत्पादन प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 0.7 किलोग्राम (वर्ष 1999 की तुलना में लगभग चार से छह गुना अधिक) होने की संभावना है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में भारत प्रत्येक वर्ष  62 मिलियन टन अपशिष्ट (पुनर्चक्रण योग्य और गैर-पुनर्चक्रण योग्य दोनों) उत्पन्न करता है, जिसकी औसत वार्षिक वृद्धि दर 4% है।

उपभोग के परिवर्तित स्वरुप और तीव्र आर्थिक विकास के कारण वर्ष 2030 तक ठोस अपशिष्ट उत्पादन के 165 मिलियन टन तक बढ़ने की संभावना है।

सर्वोच्च एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना (ISWMP) क्या है?

ISWM योजना एक पैकेज है जिसमें नीतियाँ (नियामक, राजकोषीय, आदि), प्रौद्योगिकी (बुनियादी उपकरण और परिचालन) स्वैच्छिक उपाय (जागरूकता बढ़ाना, स्व-विनियमन) सहित एक प्रबंधन प्रणाली शामिल है।

एक प्रबंधन प्रणाली में अपशिष्ट प्रबंधन के सभी पहलुओं जैसे अपशिष्ट उत्पादन से लेकर उसके संग्रहण, स्थानांतरण, परिवहन, छँटाई, उपचार और निपटान शामिल है।

यह अपशिष्ट के बारे में आँकड़े एवं जानकारी प्रदान करता है, जैसे कि किस प्रकार और कितना उत्पादन किया जा रहा है तथा वर्तमान अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों को समझना ,प्रभावी, स्थान-विशिष्ट अपशिष्ट प्रबंधन योजना निर्माण के लिये आवश्यक है।

अपशिष्ट उपचार कैसे किया जाता है?

लैंडफिल:

o गैर-पुनर्चक्रण योग्य और गैर-निम्नीकरणीय अपशिष्ट का निपटान लैंडफिल में किया जाता है।

o आधुनिक लैंडफिल में पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिये लाइनर का उपयोग करना और अन्य उपाय शामिल हैं।

भस्मीकरण(burning):

o कुछ क्षेत्र अपशिष्ट को जलाने के लिये भस्मीकरण प्रक्रिया का उपयोग करते हैं, जिससे इसकी मात्रा कम हो जाती है और ऊर्जा उत्पन्न होती है।

o हालाँकि यह विधि पर्यावरण और वायु गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को बढ़ाती है।

खाद निर्माण:

o पोषक तत्त्वों से भरपूर मृदा निर्माण के लिये जैविक अपशिष्ट, जैसे कि खाद्य और यार्ड अपशिष्ट को कम्पोस्ट किया जा सकता है।

अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित पहल क्या हैं?

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिये स्वच्छ भारत मिशन:

o इस योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन सहित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिये स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।

केंद्र सरकार ने "अपशिष्ट मुक्त शहर" बनाने के समग्र दृष्टिकोण के साथ वर्ष 2021 में स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) लॉन्च किया, जिसका लक्ष्य सभी शहरी स्थानीय निकायों को कम-से-कम 3-स्टार प्रमाणित किया जाना है (जैसा कि अपशिष्ट मुक्त शहरों के लिये प्रति स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल) जिसमें घर-घर जाकर संग्रहण, स्रोत पृथक्करण और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रसंस्करण शामिल है।

यह मिशन स्रोत पृथक्करण, एकल-उपयोग प्लास्टिक को कम करने, निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से अपशिष्ट का प्रबंधन करने तथा परंपरागत अपशिष्ट डंप साइटों के जैव-उपचार पर केंद्रित है।

o स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण चरण II के तहत, पेयजल और स्वच्छता विभाग ने राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को परिचालन दिशा-निर्देश जारी किये हैं जिनमें ग्रामीण स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन गतिविधियाँ शामिल हैं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016:

o ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 ने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और प्रहस्तन) नियम, 2000 को प्रतिस्थापित कर दिया है। वे स्रोत पर अपशिष्ट पृथक्करण पर ज़ोर देते हैं, निर्माताओं को स्वच्छता और पैकेजिंग अपशिष्ट के निपटान के लिये ज़िम्मेदार बनाते हैं एवं बड़े अपशिष्ट जनरेटर से संग्रह, निपटान व प्रसंस्करण के लिये उपयोगकर्त्ता शुल्क पेश करते हैं।


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