Friday, May 24, 2024

आवाज़ देश की: वैश्विक सेवा निर्यात

 

चर्चा में क्यों?

भारत का सेवा क्षेत्र लगातार उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है, हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (World Exchange Association WTO) की रिपोर्ट ने 2023 में सेवा निर्यात में 11.4% की वृद्धि के साथ वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी दोगुनी होने पर प्रकाश डालते हुए इस कथन को मज़बूत किया है। 



प्रमुख बिंदु क्या हैं?

             अनुमानित वृद्धि: गोल्डमैन सैक्स (एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी) का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत का सेवा निर्यात 800 बिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा, जो पिछले वर्ष के 340 बिलियन डॉलर से काफी अधिक है, इस वृद्धि से आपूर्ति पक्ष के खिलाफ बाहरी क्षेत्र को बढ़ावा मिलने और रुपए की अस्थिरता कम होने की उम्मीद है।

             निर्यात गंतव्य:  एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में बढ़ते बाज़ारों के साथ भारत, उत्तरी अमेरिका तथा यूरोप को सबसे अधिक सेवाएँ निर्यात करता है।

             चालू खाता घाटा: वर्ष 2024 से 2030 तक चालू खाता घाटा, सकल घरेलू उत्पाद का औसतन 1.1% रहने का अनुमान है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और ईरान को कृषि निर्यात में कमी के कारण सेवाओं के निर्यात से होने वाले संभावित लाभ की भरपाई के बावजूद 2024 के लिये सकल घरेलू उत्पाद के 1.3% पर अपरिवर्तित बने हुए हैं।

             वैश्विक सेवा निर्यात में योगदान: पिछले 18 वर्षों में वैश्विक सेवा निर्यात में भारत का योगदान दोगुना से अधिक हो गया है। वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी वर्ष 2005 में 2% से बढ़कर वर्ष 2023 में 4.6% हो गई, जो माल निर्यात की वृद्धि दर को पार कर गई, जबकि सेवा निर्यात में चीन की दर में 10.1% की गिरावट आई।

             ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की भूमिका: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (Worldwide Capacity Places GCC) के उद्भव ने भारत की सेवा निर्यात वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

o             इन केंद्रों ने वैश्विक सेवा बाज़ार में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

             सेवा क्षेत्रों में विकास के रुझान:

o             व्यावसायिक परामर्श: व्यावसायिक परामर्श भारत के सेवा निर्यात में सबसे तेज़ी से बढ़ते खंड के रूप में उभरा है।

o             यात्रा सेवाएँ: सेवा क्षेत्रों में यात्रा सेवाओं में सबसे धीमी वृद्धि देखी गई है।

o             वित्तीय सेवाएँ: वित्तीय सेवाओं में विशेष रूप से गुजरात, भारत में वित्तीय केंद्र गिफ्ट सिटी जैसे विकास के साथ महत्त्वपूर्ण वृद्धि देखी जा सकती है।

 सेवा क्षेत्र क्या है? 



             परिचय

o             सेवा क्षेत्र में ऐसे उद्योग शामिल हैं जो मूर्त वस्तुओं के आलावा अमूर्त सेवाएँ प्रदान करते हैं।

o             इसमें वित्त, बैंकिंग, बीमा, रियल एस्टेट, दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यटन, आतिथ्य, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (Business Cycle Re-appropriating BPO) जैसे विविध प्रकार के उद्योग शामिल हैं।

             सकल घरेलू उत्पाद (Total national output Gross domestic product) और सकल मूल्यवर्द्धन (Gross Worth Added-GVA) में योगदान:

o             भारत दुनिया का पाँचवाँ सबसे बड़ा सेवा निर्यातक है और वित्त वर्ष 2011 में कुल सकल मूल्यवर्द्धित (GVA) में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 54% थी।

o             सेवा क्षेत्र भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा प्राप्तकर्त्ता रहा है, जो वर्ष 2000 और 2021 के बीच कुल अंतर्वाह का 53% था।

भारत के लिये सेवा क्षेत्र का महत्त्व क्या है?

             व्यापार घाटा संतुलन:

o             सेवा व्यापार में अधिशेष ने ऐतिहासिक रूप से माल शिपमेंट में भारत के महत्त्वपूर्ण घाटे को कम कर दिया है।

o             इस अधिशेष का लाभ उठाकर, देश व्यापारिक निर्यात के कारण होने वाले घाटे की भरपाई कर सकता है और अधिक आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है।

             विकास की संभावना:

o             नए सिरे से सरकारी फोकस एवं रणनीतिक हस्तक्षेप के साथ, सेवा व्यापार अधिशेष में और वृद्धि की अपार संभावनाएँ हैं।

o             यह अधिशेष, जो वित्त वर्ष 2011 में लगभग $89 बिलियन था, इसका विस्तार हो सकता है, जो भारत के आर्थिक प्रदर्शन के लिये सकारात्मक प्रक्षेपवक्र का संकेत है।

             ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन:

o             सेवा क्षेत्र भारत के मुख्य रूप से 'असेंबली इकोनॉमी' से 'नॉलेज-बेस्ड इकोनॉमी' बनने के परिवर्तन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

o             सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त और शिक्षा जैसी सेवाओं पर ज़ोर देकर, भारत नवाचार, बौद्धिक पूंजी एवं उच्च-मूल्य सेवाओं द्वारा संचालित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।

             रोज़गार सृजन:

o             सेवा क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख चालक है, जो लगभग 26 मिलियन लोगों को रोज़गार प्रदान करता है और भारत के कुल वैश्विक निर्यात में लगभग 40% का योगदान देता है।

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